अध्याय १
रॉनी को दाल
में काला नज़र आता है
“लगता है, तुम किसी बात के पीछे पड़े हुए हो, रॉनी.
लगता है, मेरी ग़ैरहाज़िरी
में बहुत कुछ हो गया है.” अल्विया ने घास से एक डेजी का फूल तोड़ते हुए कहा.
रॉनी और अल्विया एक पहाडी की ढलान पर बैठे थे, जो ब्लूम्सबरी को बगल वाले गाँव से अलग करती थी.
ईस्टर की छुट्टियां थीं और अल्विया
एक हफ्ते के लिए अपने चचेरे भाई-बहनों से मिलने लन्दन गई थी.
और इस दौरान उसे छोटे-से उनींदे गाँव
में बहुत कुछ हो गया था.
“क्या तुझे वह खाली घर याद है, यहाँ
से करीब एक मील दूर, जिसे भुतहा घर कहते हैं?” रॉनी
ने अल्विया से पूछा.
“हाँ, करीब सोलह साल पहले कोई परिवार इसे
छोड़कर चला गया था. उस समय मेरे मम्मा-पापा यहाँ आये ही थे. मम्मा ने बताया था, कि
वह एक-दो बार उस घर की महिला से मिली भी थी. उनकी एक बहुत प्यारी बेटी थी और एक
दिन वे अचानक गायब हो गए. बस यूँ ही, सब कुछ छोड़-छाड़कर. मम्मा ने कहा था, कि
पूरा ब्लूम्सबरी कई महीनों तक इस बारे में बात करता रहा था. फिर सब लोग उनके बारे
में भूल गए और चूंकि घर पहाडी की तलहटी में था, उसके चारों और पेड़-पौधे बढ़ गए.”
“हाँ. और लोग कहते थे कि वहाँ से रात
को डरावनी आवाजें सुनाई देती हैं. कोई भी उस घर के पास नहीं जाता,” रॉनी ने कहा.
“कम से कम पिछले हफ्ते तक वहाँ कोई नहीं गया था.”
अल्विया ने सवालिया नज़र से उसकी और
देखा.
“पता है,
अल्विया, मैं पापा से ऐसे लोगों के बारे में पूछ रहा था जो बिना कोई सुराग छोड़े
अपने घर छोड़कर चले जाते हैं. उन्होंने बताया कि एक सर्वे के अनुसार सिर्फ
इन्ग्लैंड में ही करीब दो लाख घर खाली पड़े हैं... मोटे तौर पर...उन्हें सही संख्या
तो मालूम नहीं है. ज़्यादा भी हो सकते हैं. लोग दिवालिया हो जाते हैं और इन जगहों
का रख-रखाव नहीं कर पाते; हो सकता है कि उन पर बहुत क़र्ज़ हो
गया हो और इसलिए वे गायब हो गए; कभी-कभी प्रकृति भी तांडव करती है और लोग गुम हो
जाते हैं. कारण तो अनेक हैं, उन्होंने कहा. हालांकि कुछ घरों को सरकार ने ले लिया
और उनका इस्तेमाल “रेन-बसेरे” की तरह किया जा रहा है, मगर
ऐसे कई उपेक्षित घरों की और कोई ध्यान नहीं दिया गया , क्योंकि मरम्मत करने का
खर्च, बिजली
की नई फिटिंग का खर्च और पानी का कनेक्शन देना वाकई में सिर दर्द है!
मेरा ख़याल है कि अगर कोई लेने वाला न
हो तो घर टूट-फूट जाते हैं. मगर ये वाला तो खतरनाक है,
अल्विया. कम से कम मैं तो ऐसा ही सोचता हूँ.”
“चल, रॉनी. यहाँ हमारी बातें सुनने वाला
कोई नहीं है. तुम मुझे बता सकते हो कि क्या हुआ था.” अल्विया ने एक दिलचस्प कहानी
सुनने के लिए खुद को तैयार किया.
“अच्छा. ये सब उसी दिन हुआ जब तुम
गईं थीं. याद है, मेरे
स्कूल में फुटबॉल मैच था? तो, हमारी टीम जीत गई और
हम लड़के कुछ देर बैठकर बातें करते रहे. जब मैं घर के लिए निकला तो अन्धेरा होने
लगा था. रास्ते में मैं विलियम के घर गया, साऊथ
अमेरिका के जंगलों के साँपों के बारे में एक किताब लेने, जो उसने हाल ही में खरीदी
है और वापस आते हुए मैंने दूर पर इस घर की आकृति को देखा. मैंने सोचा कि उसकी एक
अच्छी फोटो निकल सकती है...मैंने साइकिल पार्क कर दी और कैमरे को ज़ूम किया.
घर के पास लगे बीच वृक्ष के ऊपर कुछ चमगादड उड रहे थे. मैं दावे के
साथ कह सकता हूँ कि मैंने टोपी पहने हुए एक आदमी को घर की पगडंडी पर ओझल होते हुए देखा,
जो थोड़ी बहुत साफ़ थी. मैंने कुछ देर इंतज़ार किया और फिर हल्की-हल्की डरावनी आवाजें
आने लगीं. मैं अपनी बाईक पर बैठ कर भागा. मगर मैं बड़ी देर तक सो न सका. मैंने उठकर
वह चित्र कम्प्युटर पर ‘अपलोड’ किया. जब मैंने उसे ज़ूम किया तो मैंने टोपी वाले आदमी का सिर देखा. चूंकि
वहाँ अन्धेरा था, मैं रंग नहीं देख पाया. मगर मैंने उसे वहाँ
गायब होते हुए देखा. जल्दी ही, आवाजें आने लगीं. मेरा कुतूहल
जाग उठा.”
अल्विया ने कहा, “वाकई
में बहुत दिलचस्प है! कहते रहो, रॉनी! मैं बेताब हूँ.”
“अगले दिन सुबह मैंने जल्दी नाश्ता किया,
मम्मा विलियम के घर जाने वाली थी, उनके घर में नए जन्मे बच्चे की माप
लेने...पता है, वे उस
बच्चे के लिए कपडे बना रही हैं.
पापा करीब चालीस मील दूर के किसी
गाँव में गए थे – एक गाय को देखने, जिसने हाल ही में बछड़े को जना था.
मैं इस घर की तरफ आया, स्क्विगी को अपने साथ लिया. ये मुश्किल था.
चारों और पौधे बेतरतीबी से बढे हुए थे, जिन्होंने प्रवेश द्वार और खिड़कियों
को ढांक दिया था, मगर ऐसा लग रहा था कि किसी ने पीछे की तरफ़ एक छोटा-सा रास्ता साफ़
किया था. बेलों के पीछे छुपे हुए पिछले
दरवाज़े पर ताला लगा था. मैंने घर का चक्कर
लगाया तो देखा कि बगल के किनारे वाली एक जालीदार खिड़की खुली हुई थी और स्क्विगी
उसके ऊपर कूदकर ओझल हो गया. वह कुछ ऊंचाई पर थी. मैंने कुछ देर इंतज़ार किया और फिर
सोचा कि चलता रहूँ, क्योंकि वह वापस आने का रास्ता ढूंढ ही लेगा. रास्ते के बिलकुल पास मुझे ये पतिंगा दिखाई दिया, जिसके
हरियाली लिए हुए चमकीले पंख थे और मैंने अपनी ‘मैग्निफाइंग ग्लास’ निकाल कर उसे
देखा. मेरा ख़याल है कि वह ज़ख़्मी था और उड़ने की कोशिश भी नहीं कर रहा था.
फिर मैंने एक कर्कश आवाज़ सूनी और मैं चौंक गया.
मैंने सिर
उठाया और देखा कि वह टोपी वाला आदमी मुझसे पूछ रहा था,
“ऐ लडके, तुम
यहाँ क्या कर रहे हो? क्या तुम्हें पता नहीं है कि यह भुतहा घर है और
लोग इसके पास भी नहीं आते हैं. तुम यहाँ कैसे आये?”
हालांकि मुझे यकीन था कि ये उसी आदमी
जैसा दिखाई दे रहा था जिसे मैंने कल अपने कैमरे में कैद किया था, मगर मैंने किसी
भी तरह के भाव प्रकट नहीं किये. मैंने गौर किया कि उस आदमी की कमीज़ और पतलून पर
कुछ मकड़-जाले चिपके थे. ज़ाहिर था कि वह घर के भीतर से आ रहा था.
मैंने बड़ी नम्रता से उससे कहा, “
महाशय , मुझे पता है कि ये घर भुतहा है. मैं कभी भी उस तरफ नहीं जाता...मगर ये पतिंगा
उस दिशा में उड रहा था और चूंकि मुझे इन कीटकों में दिलचस्पी है, मैं
बस ये देखने के लिए चला आया कि ये कौन सा कीटक है. इसकी हलचल रुक गई है और मैं बस, इसे
देख रहा हूँ. शायद ये ज़ख़्मी हो गया है. मैं इसे अपने रूमाल में रख लेता हूँ और चला
जाऊंगा. ओफ़! वहाँ जाना...ज़रा सोचो...मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा! मुझे भूतों से डर
लगता है.”
वह मेरे जवाब
से बहुत खुश नज़र आया और उसने मुझे वापस जाने के लिए कहा, मैं चल पडा.
दो-तीन मिनट बाद मैंने देखा कि स्क्विगी अपने मुँह में कुछ दबाये, भागता हुआ मेरी तरफ
आ रहा है. ये एक कैसेट था. मैंने कैसेट को जेब में रख लिया और घर चला आया.
क्योंकि घर
में कोई नहीं था, इसलिए मैंने ‘सेलार’ से पुराना कैसेट-प्लेयर निकाला...हाँ, आजकल तो हम सिर्फ सी.डी.
ही सुनते हैं ना, मगर पापा ने न जाने क्यों इस प्लेयर को, जिसके साथ रेडिओ था, संभाल कर रखा था. हाँलाकि हम इसका इस्तेमाल बिलकुल भी
नहीं करते, मगर फिर भी वह ‘सेलार’ में पडा है.
मैंने कैसेट
चलाया. ये उन्हीं डरावनी आवाजों की रेकोर्डिंग थी, जिन्हें मैं सुन चुका था. अब मैं उन्हें साफ़-साफ़ सुन
सकता था.
अल्विया, मेरा ख़याल है कि वहाँ कोई गड़बड़-घोटाला चल रहा है जिसके
बारे में हमें पता लगाना होगा.”
बूंदा बांदी होने लगी थी और वे दोंनो भुतहे मकान के बारे में सोचते हुए अपने-अपने घर चले गए.
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